Schema Markup क्या है? और यह SEO के लिए क्यों जरूरी है?

आइये जानते हैं Schema Markup क्या है और इससे वेबसाइट की SEO को कैसे उन्नत बना सकते हैं।

Schema markup

आज के समय में वेबसाइट की SEO को सुधारना और वेबसाइट को गूगल के पहले पेज पर लाना एक चुनौती बन गया है रोज नई नई तकनीकें आ रही हैं और उनको अमल में लाया जा रहा है।

लेकिन जो लोग तकनीक के बारे में नहीं जानते वो कैसे करेंगे? उसके लिए DigitalSpeaker हिंदी में जानकारी उपलब्ध कराते हैं ताकि आप और आपकी वेबसाइट पीछे न रह जाएं।

Schema Markup क्या हैं?

Schema Markup एक तरह के microdata होते हैं जो इसकी ऑफिसियल वेबसाइट schema.org पर पाए जाते हैं।

इन microdata को एकबार किसी वेबपेज पर डालते हैं तो यह सर्च रिजल्ट में उच्चतम गुणवत्ता की जानकारी जोड़ देता है (जिन्हें हम rich snippet भी कहते हैं)

इससे हमें कोई चीज सर्च करने में आसानी और सहूलियत होती है। यह खोज परिणाम को रुचिकर बनाता है।

क्या Schema markup आपकी वेबसाइट की रैंकिंग अच्छी करता है?

यह आपकी वेबसाइट की रैंकिंग पर सीधे रूप से कोई इफ़ेक्ट नहीं डालता है बल्कि rich snippet के जरिये आपका रिजल्ट प्रमुखता से दिखाया जाता है।

जिससे देखने वाला उत्सुकता वश उसपर क्लिक करके आपकी वेबसाइट तक जाता है। यानि इससे क्लिक थ्रू रेट बढ़ता है। जोकि रैंकिंग सुधारने के लिए जरूरी माना जाता है।

Schema किन चीजों के लिए इस्तेमाल होती है। यानि इन चीजों को खोज परिणाम में बेहतर तरीके से दिखाने के लिए schema markup का उपयोग किया जाता है।

  • व्यवसाय व कम्पनी
  • आयोजन
  • व्यक्ति
  • उत्पाद
  • भोजन विधि
  • रिव्यु
  • वीडियो

व्यक्ति के माइक्रोडेटा को वेबसाइट पर डालने से ही गूगलर में प्रसिद्ध व्यक्तियों के नॉलेज पैनल दिखाई देते हैं

गूगल अधिकतर माइक्रोडेटा को विकिपीडिया के लेखों व न्यूज़ वेबसाइट से लेता है। व रिच सनिप्ट्स के रूप में दिखाता है।

Schema markup के जरिये ही रिच स्निपट्स उच्चतम रूप में आपके रिजल्ट को दिखाता है।

व अलग अलग तरह के बॉक्स बनाकर रिजल्ट को उपयोगी बनाता है।

Schema markup को अपनी वेबसाइट पर कैसे इस्तेमाल करें।

Microdata को इस्तेमाल करना

Microdata कुछ टैग्स होते हैं जिन्हें हम अपनी वेबसाइट के html में जोड़ते हैं।

कम्प्यूटर इन microdata टैग्स को आसानी से पढ़ पाता है और वह समझ पाता है कि किस बारे में बात की जा रही है।

इन्हीं चीजों को समझकर गूगल अपने अल्गोरिदम की वजह से उचित रिजल्ट दिखा पाता है।

वेब पर ऐसी बहुत सी वेबसाइट हैं जिनसे आप अपने लिए microdata बना सकते हैं

और उसको कॉपी करने अपनी वेबसाइट पर डाल सकते हैं। जैसे

Microdatagenerator.com

इसके बाद आप गूगल के स्ट्रक्चर्ड डेटा टेस्टिंग टूल की मदद से उस microdata को चेक भी कर सकते हैं।

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